सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में लागू करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को राज्य के सभी सरकारी और निजी अभिलेखों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने सरकार से 30 सितंबर तक की रिपोर्ट भी निःशुल्क है।
यह निर्णय राजस्थानी भाषा और मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लाखों बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिलना चाहिए और राज्य सरकार को इस दिशा में प्रभावशाली नीति बनानी होगी।
तीन जजों की पीठ ने दिया ऑर्डर
यह आदेश जस्टिस विक्रमा नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय विश्नोई की तीन सर्बियाई पृकनी ने कहा। कोर्ट ने कहा कि संविधान के सिद्धांत और नई शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) के अनुसार मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है।
पृसीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि राजस्थान सरकार सभी सरकारी और निजी अभिलेखों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में उपलब्ध कराने के लिए ठोस और व्यापक नीति तैयार करे।
सूची में कई मुद्दे शामिल थे
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल में कहा गया था कि राजस्थानी भाषा को शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से आरईईटी में महत्व नहीं दिया जा रहा है। जबकि राज्य में असंख्य लोग राजस्थानी भाषा के टुकड़े और अवशेष हैं।
आदिवासियों ने मांग की थी कि राजस्थानी को स्कूल शिक्षा में स्थान दिया जाए ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहे।
मातृभाषा में शिक्षा सर्वोच्च न्यायालय का जोर
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में होने से उनका सांस्कृतिक, सांस्कृतिक और सांस्कृतिक विकास बेहतर होता है।
कोर्ट ने यह भी माना कि मातृभाषा में बच्चों की सीखने की क्षमता मजबूत होती है और उन्हें अपनी संस्कृति और मित्रता से जोड़ा जाता है।
शिक्षा व्यवस्था में हो सकते हैं बड़े बदलाव
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद राजस्थान सरकार को पाठ्यक्रम, संकाय के वीडियो और भाषा से संबंधित नई शैक्षणिक तैयारी करना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में प्राचीन काल में राजस्थानी भाषा की पढ़ाई को लेकर बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं।